10 हजार में घर से शुरू करें मोती की खेती ..{ pearl farming business 2017 }

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Special 6.30 pm - Moti Ki Kheti (मोती की खेती)

Bansal News : Moti Ki Kheti (मोती की खेती)

Moti ki kheti kese kare/ मोती की खेती कैसे करें।

मोती की खेती करने के लिए सबसे पहले सीप लानी पड़ती है फिर उसको 10 दिन तक अपने वातावरण में डालने के लिए रखनी पड़ती है जब वह अपने वातावरण में ढल जाती है उसके बाद उसकी सर्जरी की जाती है सर्जरी तीन प्रकार से की जाती है जिससे अलग-अलग प्रकार के मूर्ति मिलते हैं जैसा कि डिजाइनर मोती हाफ राउंड मोती गोल मोती आज मार्केट में डिजाइनर मोती की ज्यादा मांग है अगर किसान भाई खेती बाड़ी के साथ-साथ हैं मोती की खेती भी करते हैं तो काफी अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं अधिक जानकारी के लिए आप हमारे से संपर्क करें कैलाश मीणा कालवाड रोड हिंगोनिया जयपुर राजस्थान दूरभाष नंबर 9667529683

The Freshwater Pearl Culture

Pearl one of the most important gem in the world not only for its shining nature and for value and the religious beliefs we have especially in India. You might have heard or read that the rainwater trapped inside shells will get condensed into a pearl, and you may also be aware that it is just a myth but majority of people doesn't know that the pearls can be cultivated in backyard with freshwater and with scientific methods. This documentary “The Freshwater Pearl Culture” will showcase the History, process, valuation & current market situation of freshwater pearl culture and will have a different opinion from researchers and farmers who is into the business Note: This was a final year project of mine, meant for educational purpose only and not for any monetary benefits or commercial use. This documentary was developed under the vigilance of my department and a guide.

कर्पुर बनाने का उद्योग खोलें Start Camphor Manufacturing Business

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मोती की खेती कर लाखों कमाता है ये किसान, जानें कैसे पैदा ह...

Satyanarayan Yadav of Bamna Vahesh, Dharmi of village Khadb of Rajasthan, his Dharmapati Sajna Yadav is promoting the field of self employment by cultivating oyster cultivation in rural areas.  He started his training in his house at the cost of only Rs.10 thousand rupees. From today, he earns Rs. 20-25 thousand per month. He told that water hodge is made for pearl farming. For surgery, surgical tools, diet (stomach) have to be administered for meals and only once in a week. Pearl is used in different ways since ancient times. Pearl is a natural gem that is grown in oyster. It is supplied from the international markets by increasing its demand in Indian markets. Naturally, a pearl is formed when an external particle such as sand, insect, etc. penetrates inside or inside a shell, and the oyster can not take them out, due to which the prick is produced for the oyster. To avoid prick, the oyster secrete juice (saliva-like liquid) from itself. Which is stored on the particles of this insect or sand which is shiny.  Thus, many layers of the particles or sand are stored in this way, the easy method is used in the production of natural pearls. And this calcium carbonate, organic matter is made of water. join knowledge master facebook page = https://goo.gl/FtnRf1 join knowledge master google plus = https://goo.gl/z6zLmH

10 हजार में घर से शुरू करें मोती की खेती .....
pearl farming business 2017

अगर आपने यह सीख लिया तो आप कई लोगो को सिखा सकते है ............

नीचे कुछ एड्रेस और कांटेक्ट नंबर दे रही हूँ पता कर लीजियेगा ....

( 1 ) श्रीमान संजय मुखरु गंडाटे, गडचिरोली (महाराष्ट्र ) -- ( मो 9689763821 ;9527701124 )

( 2 ) Central Institute of Freshwater Aquaculture Kausalyaganga, Bhubaneswar-751002, ODISHA, INDIA

Phone: 91-674-2465421,2465446

FAX: 91-674-2465407

Website: www.cifa.nic.in

( 3 ) Kisaan Help Line --Tel: (+91)-7415538151
( 4 ) भारतीय कृषि अनुसंधान परिषदकृषि भवन, डा. राजेन्द्र प्रसाद रोड, नई दिल्ली 110001.

मोतियों की खेती के लिए ताजे और मीठे पानी के सीप की जरुरत होती है। ये रॉ मटेरियल मिलना बेहद मुश्किल होता है। इस कारण इसका प्रशिक्षण हर राज्य में आसानी से नहीं मिलता ....इसका ट्रेनिंग सेंटर पहले एकमात्र भुवनेश्वर में था लेकिन अब वर्तमान में कई लोगो ने भुवनेश्वर से प्रशिक्षण लेकर स्वयं इसका बिज़नेस शुरू कर दिया है और साथ ही कई लोगो को प्रशिक्षण भी दे रहे है

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